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दुनियाभर में लोकप्रिय हैं ये 12 आविष्कार, लेकिन पछता रहे हैं इन्हें खोजने वाले

ऑफिस क्यूबिकल्स (Office Cubicles)
कार्यालयों में क्यूबिकल की व्यवस्था को 1964 में डिजाइन किया गया था। इसका डिजाइन तैयार करने वाले शख्स का नाम था रॉबर्ट प्रॉप्स्ट।
रॉबर्ट ने अपने डिजाइन को एक्शन ऑफिस (Action Office) नाम दिया था। कर्मचारियों को निजता देने और काम की उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से इसे डिजाइन किया गया था।
लेकिन आज कार्यालयों में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध क्यूबिकल्स की इस व्यवस्था की खोज करने के 33 साल बाद वर्ष 1997 में रॉबर्ट ने कहा था- बड़े और खुले कार्यालयों में क्यूबिकल सिस्टम रखना पागलपन है।

 

एटम बम (Atomic Bomb)
अमेरिका के मैनहटन प्रोजेक्ट की देन है एटम बम। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व रॉबर्ट ओपनहाइमर ने की थी जिन्हें एटम बम का जनक भी कहते हैं।
पहले ओपनहाइमर अपनी इस सफलता पर काफी खुश थे। उन्होंने दुनिया का पहला परमाणु हथियार ढूंढा था। लेकिन बाद में उन्हें इसके लिए पछतावा हुआ।
इस हथियार पर प्रतिबंध लगाने के लिए उन्होंने सरकार से गुजारिश की। 1945 में तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन से भी मिले। जिसके बाद ओपनहाइमर ने कहा था- ‘मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे हाथ खून से रंगे हैं’।
इस आविष्कार को प्रोत्साहन देने वाले वैज्ञानिक आइंस्टीन को भी अपने फैसले पर पछतावा हुआ था। उन्होंने इसे अपनी सबसे बड़ी गलतियों में से एक कहा था।

 

शॉपिंग मॉल (Shopping Malls)
1950 के दशक में दुनिया में पहली बार शॉपिंग मॉल की अवधारणा विकसित करने का श्रेय विक्टर ग्रुएन के नाम है। उनका जन्म यूरोप में हुआ था। उन्हें अमेरिकन शॉपिंग मॉल का जनक भी कहते हैं।
ग्रुएन ने ऐसी जगह की कल्पना की जहां खरीदारी और संस्कृति एक छत के नीचे हो। लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि अमेरिकी मॉल्स ने असल में शहरों को बर्बाद किया। अपनी इस खोज पर उन्हें बेहद पछतावा था।

 

एके-47 राइफल्स (AK 47 Rifles)

  • मिखाइल कलाश्निकोव (Mikhail Kalashnikov) ने इस ऑटोमेटिक असॉल्ट राइफल का आविष्कार 1947 में किया था। उनके और आविष्कार के साल के नाम पर इस बंदूक का नाम ऑटोमैट कैलाश्निकोव 1947 (AK-47) रखा गया।
  • इसका आविष्कार रूसी सेना के लिए किया गया था, जिन्होंने 1949 में इस हथियार का इस्तेमाल शुरू किया। लेकिन बाद में अन्य देशों द्वारा भी इसका इस्तेमाल किया जाने लगा। आज लगभग हर देश में एके-47 मौजूद है।
  • अपने इस आविष्कार के कारण कैलाश्निकोव रूस के हीरो बन गए थे। पूरी जिंदगी अपने आविष्कार का पक्ष भी लेते रहे और हिंसा के लिए राजनेताओं को जिम्मेदार ठहराते रहे। लेकिन अपनी 2013 में मृत्यु के एक साल पहले उन्होंने रूस के ऑर्थोडॉक्स चर्च को एक चिट्ठी लिखी जिसमें इस हथियार को बनाने के बाद का दर्द बयां किया। लिखा कि इसके कारण होने वाली हत्याओं के लिए वह खुद को जिम्मेदार मानते हैं और यह उनके लिए असहनीय है।

 

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