पाकिस्तान और अफगानिस्तान में’ ‘महिलाओं पर अत्याचार

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महिलाओं पर अत्याचारों, बलात्कारों, तेजाब हमलों, अपहरण तथा घरेलू हिंसा के मामले में मुस्लिम देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान सबसे खतरनाक देशों में गिने जाने लगे हैं और पाकिस्तान को तो महिलाओं के मामले में विश्व का तीसरा सबसे खतरनाक देश कहा जा रहा है।

पाकिस्तान में अगस्त 2018 में प्रधानमंत्री इमरान खान के सत्ता में आने के बाद वहां महिलाओं पर अत्याचार 200 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और वर्ष 2020 में वहां प्रतिदिन औसतन 11 बलात्कार हुए। गत वर्ष महिलाओं पर अत्याचारों के सर्वाधिक 57 प्रतिशत मामले पंजाब प्रांत में दर्ज किए गए जबकि 27 प्रतिशत मामलों के साथ सिंध दूसरे स्थान पर रहा। वहां अल्पसं यक  हिन्दू, सिख, ईसाई महिलाओं के उत्पीडऩ व धर्मांतरण के अलावा उनके मुसलमान युवकों व बूढ़ों से जबरदस्ती विवाह करवाए जा रहे हैं जिसके विरुद्ध वहां जागरूक महिलाओं-पुरुषों ने ‘औरत मार्च’ अभियान शुरू किया है।

गत सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की फैशनेबल बस्ती के एक लैट में बुरी तरह पिटाई की शिकार ‘नूर मुकादम’ नामक 27 वर्षीय युवती द्वारा जान बचाने के लिए घर की खिड़की से बाहर छलांग लगा देने के बावजूद उसके बचपन का दोस्त जफीर उसे घसीट कर अंदर ले गया और दोबारा मारपीट करने के बाद उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी।

मानवाधिकार कार्यकत्र्ता ताहिरा अब्दुल्ला के अनुसार यह तो एक उदाहरण मात्र है जबकि पाकिस्तान में बड़ी सं या में महिलाएं हिंसा का शिकार हो रही हैं और अक्सर उनकी मौतों पर पर्दा डाल दिया जाता है। ताहिरा अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मैं आपको सिर्फ पिछले एक सप्ताह में महिलाओं पर हुए तरह-तरह के हमलों की अपनी बांह से भी ल बी सूची दे सकती हूं। पाकिस्तान में महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराध और ङ्क्षहसा ‘खामोश महामारी’ बन गई है जिसके बारे में कोई नहीं बोलता।’’

‘‘पाकिस्तान की संसद पतियों द्वारा किए जाने वाले हमलों सहित घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाने वाला विधेयक इस महीने भी पारित करने में विफल रही। संसद ने एक ‘इस्लामी विचारधारा परिषद’ को इस बारे विचार करने का जि मा सौंपा है जिसने कुछ समय पूर्व यह फतवा दिया था कि ‘‘पतियों द्वारा अपनी पत्नी की पिटाई करना जायज है।’’ महिलाओं के प्रति इस प्रकार के दृष्टिकोण के कारण प्रधानमंत्री इमरान खान भारी आलोचना के शिकार हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि वह अपने देश की महिलाओं पर अत्याचारों को धर्म का सहारा लेकर छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने देश में बलात्कार के बढ़ते मामलों के लिए महिलाओं के पहनने वाले कपड़ों को ही जि मेदार ठहराया था।

ताहिरा अब्दुल्ला का यह भी कहना है कि तीन शादियां करने वाले इमरान खान ने रुढि़वादी इस्लाम को अपना लिया है और वह एक ऐसे धार्मिक व्यक्ति के साथ गहरा संबंध रखते हैं जिन्होंने महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों के लिए कोविड-19 को दोषी ठहराया था। जहां तक अफगानिस्तान का संबंध है, वहां अमरीकी सेनाओं के रहने तक महिलाओं की स्थिति पाकिस्तान जैसी खराब नहीं थी पर अब देश में तालिबान के फिर से आने के बाद उनकी सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

काले तालिबानी कानूनों के अंतर्गत वहां अफगान आतंकवादी जबरदस्ती लड़कियों से शादी कर रहे हैं तथा तालिबानों ने महिलाओं पर 2001 से पहले वाले शरई कानून लागू करना शुरू कर दिया है। महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध लगाने के लिए बदनाम तालिबान के अनुसार महिलाएं काम के लिए बाहर नहीं जा सकतीं, दुकानदार पुरुषों से सामान नहीं खरीद सकतीं व पुरुष डाक्टर के पास इलाज के लिए नहीं जा सकतीं।

यहां तक कि सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल, ऊंची एड़ी के जूते पहनने, बाइक, साइकिल चलाने, खेल-कूद में हिस्सा लेने, बालकनी और खिड़कियों से बाहर झांकने पर भी रोक है। तालिबानी जज गुल रहीम के अनुसार,‘‘अफगानी महिलाओं को घर से बाहर जाने की अनुमति तो होगी लेकिन इसके लिए उन्हें परमिट लेना होगा। वे स्कूल तो जा सकेंगी पर हिजाब पहन कर व महिला टीचर के पास ही।’’

अफगानिस्तान में शिक्षा से वंचित बच्चों में 60 प्रतिशत लड़कियां हैं जो पढऩा तो चाहती हैं परंतु तालिबान के भय से उनके माता-पिता उन्हें स्कूल भेजना नहीं चाहते। कुल मिलाकर पाकिस्तान के शासकों के उपेक्षापूर्ण रवैये और अफगानिस्तान में तालिबान के काले कानूनों के चलते वहां महिलाओं की सुरक्षा व उनके भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।