सिंड्रेला की कहानी

सिंड्रेला की कहानी बच्चों में बहुत लोकप्रिय है. यह एक ऐसी प्रेम कहानी है जिसे सुनकर हर लड़की सिंड्रेला बनना चाहती है. सिंड्रेला एक शहर में रहने वाली लड़की थी. उसके पिता एक व्यापारी थे. उनका व्यापार खूब चलता था. घर में रूपये पैसे की कोई कमी न थी. सिंड्रेला जिसे उसे पिता प्यार से एला बुलाती थी, अपने पिता की प्यारी बेटी थी. सबकुछ अच्छा चल रहा था लेकिन तभी सिंड्रेला के मां की मौत हो गई. अपनी मां की मौत के बाद सिंड्रेला उदास रहने लगी.

सिंड्रेला की उदासी दूर करने के​ लिए उसके पिता ने दूसरा विवाह करने का निर्णय लिया ताकि सिड्रेला को उसकी मां मिल जाए. सिंड्रेला के पिता ने जिस महिला से विवाह किया उसकी पहले से दो पुत्रियां थी. ऐसे में सिंड्रेला को मां के साथ दो बहने भी मिल गईं. सिंड्रेला बहुत खुश हुई लेकिन उसकी खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टिकी क्योंकि उसकी सौतेली मां और बहने बहुत ही दुष्ट और कपटी थी. हालांकि सिंड्रेला के पिता के डर से वे उसे कुछ न कहती लेकिन उसे अपने साथ नहीं रखती.
समय ने पलटा खाया और सिंड्रेला का सिर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. सिंड्रेला के पिता व्यापार के सिलसिले में दूसरे शहर गए और वहां एक दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई. पिता की मृत्यु होते ही सिंड्रेला की मां ने सारे व्यापार को अपने कब्जे में ले लिया और सिंड्रेला को एक नौकरानी बना दिया. उसकी बहनो ने उसके सारे अच्छे कपड़े उससे छील लिए और उसके कमरे पर अपना कब्जा जमा लिया. घर के सारे काम अब सिंड्रेला को करने पड़ते थे. दरअसल सिंड्रेला का वा​स्तविक नाम एला था और सिंड्रेला उसको चिड़ाने के लिए उसकी बहने कहती थी क्योंकि एला हमेशा राख में सनी रहती थी.
इसी तरह दिन गुजरते रहे और सिंड्रेला हमेशा अपनी मां और पिता को याद करती. सिंड्रेला की मां कहती थी कि दूर देश की परियां हमेशा दुखी बच्चों की सहायता करती है. अगर उन्हें सच्चे मन से याद किया जाए तो वे हमारी मदद के लिए आती हैं. सिंड्रेला सोचती की काश कोई अच्छी सी परी आकर उसकी मदद करती और उसके सारे दुख दूर कर देती. इसी तरह उसके दिन कट रहे थे.
सिंड्रेला जिस शहर में रहती थी, उसका राजा अपने बेटे की शादी शहर की सबसे सुंदर लड़की से करना चाहता था. इस काम को पूरा करने के लिए उसने अपने बेटे का स्वयंवर रचा. पूरे शहर में मुनादी करवाई गई कि राजकुमार आज रात को एक शानदार भोज का आयोजन कर रहे हैं. इस आयोजन में शहर की सभी लड़कियों को बुलाया गया है. आयोजन में आने वाली सबसे सुंदर लड़की से राजकुमार का विवाह होगा. यह सुनते ही शहर की सारी लड़किया अपने को सजाने और सुंदर कपड़े सिलवाने में लग गई ताकि वे राजकुमार का मन जीत कर शहर की रानी बन सके.
सिंड्रेला की बहने भी इस सामारोह में जाने की तैयारी करने लगी. उसकी सौतेली मां ने अपनी बेटियों के बहुत सुंदर पोशाक सिलवाई. उन्हें तैयार करने के लिए बाजार के सबसे अच्छे सौंदर्य प्रसाधन मंगवाए गए. सिंड्रेला को किसी ने नहीं पूछा. उल्टे उसकी सौतेली मां ने उसे ताकीद किया कि वह भूल कर भी समारोह में नहीं जाएगी. सिंड्रेला इतनी ज्यादा सुंदर थी​ कि फटे कपड़ों में भी उसका सौंदर्य खिला रहता था. उसकी सौतेली मां को डर था कि सिंड्रेला के आगे उसकी बेटियों की दाल नहीं गल सकती.
सिंड्रेला रात को सबके समारोह में जाने के बाद आंसू बहा रही थी क्योंकि उसका भी मन था ​कि वह राजकुमार से शादी करे. उसके मन से आवाज निकली कि काश कोई परी आकर उसकी मुराद पूरी कर दे. सिंड्रेला ने यह सोचा तभी वहां एक सुंदर परी प्रकट हो गई और उसने सिंड्रेला से पूछा किस उसकी क्या इच्छा है. पहले तो सिंड्रेला को इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ कि उसके सामने सच में एक परी खड़ी है. परी ने सिंड्रेला को विश्वास दिलाया कि वह कोई सपना नहीं देख रही है बल्कि वह सच में उसकी मदद करने आई है.

सिंड्रेला ने परी को कहा कि वह भी उस समारोह में जाना चाहती है और राजकुमार का दिल जीतना चाहती है लेकिन न तो उसके पास अच्छे कपड़े और न वहां पहुंचने का कोई साधन ही है. परी ने कहा बस इतनी सी बात और अपनी छड़ी घुमाई. सिंड्रेला के चिथड़े कपड़े बहुत सुंदर और शानदार हो गए. वह इतनी सुंदर लग रही थी कि परी की सुंदरता भी उसके सामने फीकी पड़ रही थी. परी ने फिर छड़ी घुमाई और सिंड्रेला के टूटे जूते कांच के सुंदर सैंडिल बन गए.
सिंड्रेला अब तैयार हो गई थी लेकिन उसके पास जाने का कोई साधन नहीं था. परी ने यहां—वहां देखा तो उसे चार चूहे दिखाई दिए. उसने फिर छड़ी घुमाई और चारो चूहे सुंदर घोड़े बन गए. उसने लकड़ी के एक खाली ड्रम को बग्घी में तब्दील कर दिया और वहां से गुजर रहे एक मेंढक को कोचवान बना दिया. उस बग्घी पर सवार होकर सिंड्रेला किसी देश की राजकुमारी जैसी लग रही थी. परी ने कहा कि उसने अपना काम तो कर दिया है लेकिन सिंड्रेला को भी एक बात याद रखनी होगी कि उसका जादू रात के 12 बजे खत्म हो जाएगा और उससे पहले उसे वापस लौट आना होगा.
जब सिंड्रेला समारोह में पहुंची तो सबकी आंखे फटी रह गई. किसी ने अपने जीवन में इतनी सुंदर लड़की नहीं देखी थी. राजकुमार को देखते ही सिंड्रेला से प्रेम हो गया. सिंड्रेला ने राजकुमार के साथ डांस किया और उसकी बाहों में झूमी. राजकुमार ने उसके होंठो को चूम लिया. यह सब चल रहा था तभी सिंड्रेला को याद आया कि 12 बजने वाले वाले और वह जादू खत्म होने से पहले निकलने के लिए वहां से जोर से भागी. इस भाग—दौड़ में उसके एक पैर से कांच का जूता फिसल कर वहीं रह गया.
रात को घर पहुंच कर सिंड्रेला ने राहत की सांस ली कि वह जादू खत्म होने से पहले निकल गई और उसका भांडा फूटने से बच गया. अब राजकुमार ने भी जिद ठान ली कि वह उसी लड़की से शादी करेगा जिसके पैर का जूता यहां छूट गया है. राजा ने अपने बेटे की इच्छा पूरी करने के लिए जूता पूरे शहर में घुमाया और हर लड़की को पहना कर देखा गया कि वह किसका जूता है. जूता जब सिंड्रेला के घर आया तो उसकी सौतेली बहनों ने भी जूता पहन कर देखा लेकिन उनको वह जूता नहीं आया.
सिंड्रेला की बारी आई तो पहले सौतेली मां ने मना कर​ दिया लेकिन जब सिपाहियों ने जबरदस्ती की तो सौतेली मां ने जूता पहनने की स्वीकृति दे दी. जैसे ही सिंड्रेला ने जूता अपने पैर में डाला उसे ​वह फिट हो गया और राजकुमार को अपने सपनो की राजकुमारी ​सिंड्रेला मिल गई. राजकुमार ने सिंड्रेला से बहुत धूमधाम से शादी की और इसके बाद वे सूख से रहने लग गए.
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