चीन में 1911 की क्रांति के कारण ?

चीन में 1911 की क्रांति की पृष्ठभूमि

चीन की 1911 की क्रांति के फलस्वरूप चीन के अन्तिम राजवंश (चिंग राजवंश) की समाप्ति हुई और चीनी गणतंत्र बना। यह एक बहुत बड़ी घटना थी। मंचू लोगों का शासन चीन पर पिछले तीन सौ वर्षों से चला आ रहा था जिसका अंत हो गया। बीसवीं शताब्दी में चीन एशिया का प्रथम देश था, जहाँ गणतांत्रिक सरकार की स्थापना हुई। चीन के क्रांतिकारियों ने फ्रांसवालों का अनुकरण किया और राजतंत्र का सदा के लिए अंत कर दिया।

1894-95 ई. के चीन-जापान युद्ध के बाद चीन में पश्चिमी देशों की लूट-खसोट में हुई वृद्धि की तीव्र प्रतिक्रिया हुई और चीनियों ने सुधारवाद का नारा दिया। सुधारवादियों से प्रभावित होकर सम्राट ने 1998 ई. में चालीस अध्यादेश जारी किए। किन्तु प्रतिक्रियावादियों ने साम्राज्ञी त्जु शी पर दबाव डालकर सुधारों की योजना रद्द करवा दी। फलस्वरूप चीन में विदेशियों के विरुद्ध जबरदस्त आंदोलन उठा जो बॉक्सर आंदोलन के नाम से प्रसिद्ध है। परंतु पश्चिमी देशों ने इस आंदोलन को कुचल दिया और मंचू सम्राट को बॉक्सर प्रोटोकोल पर हस्ताक्षर करने के लिये बाध्य किया। बॉक्सर प्रोटोकोल से मंचू शासन का खोखलापन स्पष्ट हो गया और सुधारों की माँग प्रबल होने लगी। मंचू शासन साम्राज्ञी त्जु शी ने अनुभव किया कि जब तक चीन में सुधार करके उसे सशक्त राष्ट्र नहीं बनाया जाएगा तब तक चीन में विदेशियों की लूट-खसोट को नहीं रोका जा सकेगा। रूस पर जापान की विजय ने इस भावना को और भी प्रबल बना दिया।

सर्वप्रथम राजनीतिक सुधारों को हाथ में लिया गया। 1905 ई. में पाँच व्यक्तियों का एक दल विदेशों की संवैधानिक पद्धतियों का अध्ययन करने के लिये बाहर भेजा गया। वापस लौटकर उसने संविधान बनाने का काम शुरू किया। इसके परामर्श के अनुसार 1908 ई. में सरकार ने एक नौ वर्षीय संवैधानिक कार्यक्रम की घोषणा की। इस घोषणा के अनुसार 1909 ई. में आम चुनाव हुए तथा प्रांतीय विधान सभाओं की बैठक हुई। इन्होंने राष्ट्रीय संसद की जोरदार माँग की। अतः 1910 ई. में पीकिंग में केन्द्रीय विधान सभा का प्रथम अधिवेशन हुआ। इसे कानून बनाने तथा बजट के संबंध में कुछ अधिकार दिए गए। किन्तु इसके दो सौ सदस्यों में से आधे सदस्य सम्राट द्वारा मनोनीत होते थे। मई, 1911 ई. में एक मंत्रिपरिषद का भी गठन किया गया, किन्तु वे सभी सम्राट के प्रति उत्तरदायी थे। 1911 ई. में ही पश्चिमी तरीके की एक राष्ट्रीय सेना संगठित की गई। 1907 ई. में न्याय विभाग को सामान्य प्रशासन से अलग किया गया और 1911 ई. में एक दंड-संहिता भी बनाई गई।

1901 ई. में एक राष्ट्रीय विद्यालय-व्यवस्था का श्रीगणेश करते हुये शिक्षा संबंधी सुधार भी आरंभ किए गये। 1903 ई. में शिक्षा मंत्रालय स्थापित किय गया तथा जापानी नमूने की शिक्षा-पद्धति तैयार की गई। शिक्षा के स्तर एवं प्रशासन में एकरूपता पैदा करने के लिये एक केन्द्रीय बोर्ड की व्यवस्था की गई। 1905ई. तक चीन में 57,000 विद्यालय, 90,000 अध्यापक और 16 लाख से अधिक विद्यार्थी हो गए। किन्तु चीन की 40 करोङ जनसंख्या को देखते हुए यह प्रगति नगण्य-सी थी। इसके अलावा कई हजार विद्यार्थी यूरोप और अमेरिका में पढते थे, जिनमें बाद में क्रांति की चिन्गारियाँ फूटी थी।

आर्थिक सुधारों के अन्तर्गत 1911 ई. में रेल लाइनों के राष्ट्रीयकरण की योजना बनाई गई, 1906 ई. में अफीम की पैदावार और उसके सेवन पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए, 1909 ई. में कर विधान को सुधारने के लिये एक समिति बनाई गई तथा केन्द्र एवं प्रांतीय वित्त व्यवस्था को समन्वित करने के प्रयास किये गये। किन्तु प्रान्तीय अधिकारियों के विरोध के कारण सुधारों की योजना असफल होने लगी।

15 नवम्बर, 1908 को साम्राज्ञी त्यु शी की मृत्यु हो गयी। वह मंचू राजवंश की एक विलक्षण महिला थी। उसकी योग्यता, कुशलता, शक्ति और साहस के सामने सभी नत मस्तक होते थे। किन्तु कट्टरता, रूढिवादिता, अहंकार, क्रूरता आदि ने उसकी योग्यता को कुंठित कर दिया था। साम्राज्ञी की मृत्यु के एक दिन पहले सम्राट कुआंग शू की भी मृत्यु हो चुकी थी। साम्राज्ञी ने अपने मित्र रूंग लो के किशोर पौत्र को सम्राट का उत्तराधिकारी चुना तथा उसके पिता को संरक्षक नियुक्त किया। किन्तु दूसरे दिन साम्राज्ञी की मृत्यु होते ही मंचू शासन का बिखरना निश्चित हो गया। नया संरक्षक सुधारों का पक्षपाती था, लेकिन वह शासन का मंचीकरण करना चाहता था। अतः वह चीनियों को विशिष्ट पदों से हटाने लगा, जिससे देश में घोर असंतोष व्याप्त हो गया। प्रांतीय सरकारों ने केन्द्र की अवहेलना आरंभ कर दी। चारों ओर अराजकता और अव्यवस्था फैल गई। ऐसी विघटनकारी परिस्तथितियों में 1911 ई. की चीनी क्रांति हुई और इस क्रांति के फलस्वरूप मंचू शासन की समाप्ति हो गई।

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